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Thursday, 3 December 2015

कई सालो से कई एलान किये गये सरकार द्वारा कभी फ्री लैपटॉप, स्कूटी, भत्ता परंतू न किसी सरकारी नये विद्यालय बनबाये और न उनके विकास के लिये भत्ते की घोसना , हमेशा बोला जाता शिक्षा बच्चो का जन्मसिद्ध अधिकार है। बरसो से चले आ रहे मैनेजमेंट न ही स्कूल्ज बनबाये सहायता के नाम पर सिर्फ बच्चो का जीवन उजाड़ने बाले टीचर, जो किसी न किसी सोर्स से एंटर कर जाते है, और वर्सो तक यही सिलसिला चलता जाता है.
क्या लैपटॉप बच्चो की बेहतर शिक्षा से एहम है।
क्या सरकारी स्कूल्ज का आधुनिकरण नही होना चाइये.
क्या आईटी के इस युग में बच्चो को कंप्यूटर से दूरी सही है।
क्या बच्चो का पेट भरना ही काफी है , जनाब स्कूल शिक्षा का मंदिर है ढाबा नही।  कवर पेट भरना आज खुस कर सकता है परन्तु जीवन जीने का तरीका कान्हा से सीखे
क्या हमारा विवेक इतना मिट गया की हिन्दू-मुस्लिम , राम-अल्लाह, मंदिर-मस्जिद पर ही रह जाएगे
              देश में केंद्रीय स्कूल केवल सरकार कर्मचारी के बच्चो के लिए है , क्या केंद्रीय स्कूल स्तर के स्कूल किसान ओरे मजदूर के बच्चो को नही मिल सकते ,

क्या ये प्राभदान नही होना चाइये की सरकारी सेवा लेने बाले हर ब्यक्ति को अपने बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ाने होंगे, ओर उलंघन करने बालो को सरकार सुभिधाओ से बंचित  करदेना चाइये।
    दोस्तों लोकपाल , रिजर्वेशन तो ठीक है परन्तु इनसे ऊपर भी कई चीज़े है जिन्हे सुधार की आवसयकता है.

क्या आप भी इस उम्मीद है आपका बच्चा जो आठबी पास है और मुख़्यमन्त्री  बन जायेगा।  तब तो ये ठीक है हम आपके इच्छा पूरी होने  की कामना करते है
         

Friday, 20 November 2015

आओ पहल करते है ,

आओ पहल करते है ,

में इस बात की घोसणा करता हु ललकार ग्रुप का हर परिवार अपनी एलपीजी सब्सिडी छोड़ देगा जिस दिन नेताओ और मिनिस्टर को मिलने बाली  सभी सुभिधाएँ छोड़ दे, करोड़ो विदेश यात्रा , और कैंटीन में मिलने बलि छूट , भत्ता सब छोड़े ,
क्या ये सब छूट गरीब को मिलने बाली  सब्सिडी  से कम है।  गरीबो का दिल बहुत बड़ा है जब 0 अमाउंट पर खाता खुल्बाने पर २०००० करोड़ जमा कर डाले , तो बिस्वास रख्खिये जनाब मंत्री जी पहल करे तो हर घर सब्सिडी छोड़ देग.
                  और बेसे गरीब के सब्सिडी छोड़ने से किसी और गरीब को कैसे फायदा होगा, कनेक्शन अब भी मिलते है पैसो के बदले पैसा न गरीब के पास तब था न आज है,  चलो ऐसा करो हमारी एलपीजी सब्सिडी जिंदगी भर के लिए लेलो और तुरंत किसी गरीब को फ्री कनेक्शन देदो तुरंत सामने अगर ये सम्भब है तभी एलपीजी की सब्सिडी छोड़े।  क्या सारे त्यागने का काम जनता करे।  २० करोड़ रुपया सालाना विदेश यात्रा में खर्च करते है। pm  साहब का तो ठीक है जनाब हर मुमकिन कोसिस कर रहे है तरक्की लाने की पर ६० की उम्र में एजुकेशनल ट्रिप पर जाना ये तर्क सांगत नही लगता , ओरे बैसे राजनीती में आने के लिये कौनसी एसएससी की परीक्षा पास करनी पड़ती है।  pm साहब मैं की अबाज आपके हम तक तो आगई क्या "जनता की आवाज'" आपने सुनी।
केंद्रीय कर्मचारी की १६ % बेतन बढ़ गया ये कोनसे अच्छे काम का बोनोस से दिया और bsf और आर्मी को क्या मिला।  कमाल है

Sunday, 11 October 2015


“In India, ‘Bhakti’ or what may be called the path of devotion or hero-worship plays a part in politics unequalled in magnitude by the part it plays in the politics of any other of the world. ‘Bhakti’ in religion may be a road to salvation of the soul. But in politics, ‘Bhakti’ or hero-worship is a sure road to degradation and to eventual dictatorship.”

Monday, 5 October 2015

‘मुझे खिलौनों से नहीं कंप्यूटर से प्यार है। वैसे लोग कहते हैं कि ये कठिन है, पर मुझे तो नहीं लगा'', यह कहना है 5वीं क्लास के छात्र रोनिल शाह का जिसने Java SE-6 के 3 घंटे टेस्ट महज 18 मिनट में पास कर लिया। रोनिल का लक्ष्य एडवांस जावा, रोबोटिक्स, आईफोन और एंड्रॉयड के बारे में सीखना है।
रोनिल पर हमे गर्व है।

kya arakshan sach mein galat hai

हिन्दू ग्रंथो में जिस प्रकार ये बर्णित था , ब्राह्मण का सर्बोच्या स्थान, राज  करने का अधिकार केवल छत्रियो को, ब्यापार बैष्णवों को, और सूद्र केवल सेवा कर सकता है। कर्ण का पूर्णताः योग्य होने पर भी गुरु द्रोण द्वारा उन्हें शिक्षा न देना और इसी क्रम में एकलव्या के साथ किया गया छल।  क्या ये धर्म संगत था गीता के अनुसार ब्यक्ति सर्बोच्या कर्मो से होता है न की उसकी जाति  से। अगर ये है तो बर्तमान में सुतो को आरक्षण पूर्णतः न्यायसंगत है। युग बदला वक़्त बदला आरक्षण का मुद्दा सदैव बेहेस का मुद्दा बना रहता है। और ये बिचार मेशा सुनने में आते है की ये सामान्य श्रेणी की लोगो के साथ अन्याय है।  जब ये सुतो के साथ हुआ था तब ये हमारा धर्म था ईस्वर की बानी थी।  जब गुरु द्रोण सुतो की तरफ अपना पक्ष देता है तो इसमे अन्याय क्या।
क्या हिंदुस्तान सच में जातिबाद की सीमाओ से आगे बड़ चूका है ?
अगर हाँ ! केवल धर्म परिवर्तन करने बाले केवल सूत समुदाय से होते है क्या उन्हें अपने इस्वर पर भरोसा नही है।  नही केवल और केवल हमारा समाज , हमारा ब्यबहार केवल उत्तर दाई है।  क्यों हम किसी ब्यक्ति को अपने से कम आंकलन करते है, ललकार ग्रुप उन सभी सफाई कर्मियों को सर्बोच्च समझता है क्यूंकि बे सचमें अछूत है क्यूंकि बे अपने सुभिमान से दूर हटकर देश की सेवा करते  क्या उनका शरीर हमसे अलग है क्या उनसे ये पूछा  गया था की बे अछूत बनेगे नही। जीवन का सबसे बड़ा दुख उनके जन्म क उपहार के रूप में मिलता है। आरक्षण का बिरोध करने बालो में , में या कोई और अगर ये समझता है की अछूत को सम्मान स माज देगा ये बही बात होगी , सहारा में बारिश पड़ेगी और बन्हा हरीयाल आयेगी ये सम्भब नही है न उनके हक़ के बदल आयेगे न ही न खुशियो की बारिश होगी ,
                    हम उस वक़्त में जी रहे है अगर अनुसूचित   प्यासा  भी मरता है तो लोग उसे पानी देने से पहले उसकी जात पूछेंगे ,  आरक्ण के जन्म दाता भीम राओ अम्बेडकर इसी इस्तीथी से उथान के लिये इसे संभिधान में जोड़ा। जाति यहांतक हमारे देश के कुछ बिदूान लोग तो पुरे प्रदेश से परहेज़ करते है , सोच बदलिये जनाव हम सब पशु नही है जिन्हे श्रेणी और बर्गो में बांटा जाये की, ये उच्चा श्रेणी का है और ये तुच , देश की सेवा करने वाला हर पहरेदार हिंदुस्तानी की हिफाजत करता है न किसी ब्यक्ति बिशेष और जाति बिशेष की , देश की अखंडता तभी बनी रहेगी जब देश के हर ब्यक्ति की जाट हिंदुस्तानी और मजहब इंसानियत होगी,
                                

Thursday, 30 July 2015

गोहत्या के खिलाफ शहर मुफ्ती ने की अपील

एक बार फिर अलीगढ के मुख्या मुस्लिम  धर्म गुरु मोह. खालिद साहब ने ये साबित कर दिया की देश का हिन्दू हो या मुस्लमान जब देश की बात आती है तो बो सिर्फ हिंदुस्तानी होता है।  और उसका मजहब देश की रक्षा होता है। खालिद साहब की तरह हिन्दू और सभी मुस्लिम एक दुसरो की भावनो की की कदर करे तो देश में सदेव अमन बना रहेंगे। हिन्दू मुस्लिम भाइयो को उकसाने बाले वो जो हमारे नेता कहलाते है। उनकी बातो को महत्ब न दे। ये न किसी मजहब के होते है न जात के ये सिर्फ बोटो की राजनीति के लिये किसी भी हद तक जा सकते है।


khalid sahab
source: amar ujala
गोहत्या के खिलाफ शहर मुफ्ती ने की अपील
अमर उजाला ब्यूरो
अलीगढ़। गोहत्या के खिलाफ बुधवार को शहर में मुसलिम समाज सड़कों पर उतर आया। शहर मुफ्ती मोहम्मद खालिद हमीद ने गो हत्या के खिलाफ अपील जारी की।
शहर मुफ्ती ने लोगों से कहा है कि ‘अल्लाह ने बहुत सी चीजों को हलाल करार दिया है। और उनके इस्तेमाल करने की इजाजत दी है। लेकिन ये हुक्म नहीं दिया है कि हम इन तमाम हलाल की चीजों को जरूर इस्तेमाल करें। इसी तरह गाय के हलाल होने का मसला है। हमारे मुल्क में चूंकि ‘गो हत्या’ से हमारे बहुत से हिंदू भाइयों की भावनाओं और जज्बातों को ठेस पहुंचती है, इसलिए हम पर ये लाजिम है कि हम इससे परहेज करें। और अपने हिंदू भाइयों की धार्मिक भावनाओं का एहतराम करें, ताकि हमारा भाईचारा भी कायम रहे व हमारे दर्मियान नफरत की दीवार खड़ी न हो। अलबत्ता हमारी शरीअत जहां हमें वाज-ए-हुक्म देती है उस हुक्म से मुंह मोड़ने की मजाल हर्गिज जायज नहीं है’।
संंबंधित खबरें पेज 3 पर

•कहा, जिन चीजों से हिंदू भाइयों की भावना को ठेस पहुंचती है उससे परहेज करें


Wednesday, 1 July 2015

दोस्तों आज ट्रैन से आते वक़्त देखा ,एक बच्चा अपनी माँ से पूछता है।  माँ! अलीगढ आ गया क्या। माँ बोलती है हा पर तुझे कैसे पता लगा। बच्चा कहता है माँ ये गंदगी दिखने लग गई में समझ गया अलीगढ आ गया ,

क्या दोस्तों अपने अलीगढ के पहचान गंदगी और ये नाले ही रह गए है क्या,बिचार कीजिये।  एक बार !
जिलाध्यक्ष राजीव रौतेला द्वारा एक पहल की गई थी जिसके तहत अलीगढ में खली स्थानो पर पेड़ लगाने की योजना थी , आदेश का पालन भी हुआ , पेड़ भी लगे परन्तु मीठी उर्बरक न होने के कारन पोधे ख़राब हो गए, 
ललकार ग्रुप डीएम साहब के इस कार्य के प्रसंसा करता है, पर क्या पोधे ही महज कार्य था क्या सीमेंट की सड़को पर पोधे लगाये जा सकते थे अशोक जैसे बृक्ष को काफी मात्र में मिटटी की आबसयकता थी, क्या हाथ भर मिटटी प्पर्याप्त थी। फलतः करोड़ो रुपयो की बर्बादी , सोचिये ग जिम्मेदार कौन डीएम या हम. 
क्या हमारा कर्तब्य नही बनता था हम इसका बिरोध करे सोचिये, 

Friday, 13 March 2015

इन दिनों गौ हत्या करने वालो  मृत्युदंड देने की मांग जोरो सोरो से उठ रही है। पर लोग ये भूल गये है की उस देश में रह है है जँहा निर्भया  के हत्यारो  को सरकारी मेहमान बना रखा है। अब तो अख़बार में रोजाना पड़ने को मिलता है मासूम के साथ बलातकार यंहा बन्हा। १६ दिसंबर की घटना के बाद लगा था अब देश में अच्छा कानून ब्यबस्ता आएगी पर कुछ नही हुआ दरिंदे रोजाना मासूमो को अपनी हवस का शिकार बनाते है ओरे कार्यबाही के नाम पर सिर्फ fir और फिर ये फाइल किसी कोने की शोभा बढ़ाती है हद्द है।  इन लोगो को मृत्युदंड नही मिलेगा तो फिर किसे मिलेगा। इसे तरह एक और दरिंदा अपनी जिंदगी मजे से काट रहा है सुरेन्द्र कोहली ,

बंगला नंबर 10 में बतौर नौकर काम करने वाला 39 वर्षीय सुरिंदर कोली अपने गेट पर नज़र रखता था। शाम ढलते वक्‍त जब इलाके में सन्‍नाटा छा जाता था, तब वो गेट के पास से निकलने वाली लड़कियों को पकड़ लेता और मुंह में कपड़ा ठूस कर उनके साथ बलात्‍कार करता था। उसके बाद उन लड़कियों की हत्‍या कर उनके शव के कपड़े उतार कर फिर से बलात्‍कार करता था। कोली की हैवानियत तब तो चरम पर होती थी, जब वो उन्‍हीं लड़कियों के शव के टुकड़े कर उन्‍हें खाता था और बचे कुचे टुकड़ों को बंगले के कंपाउंड में दफ्ना देता था। ये सभी बातें कोली ने नारको टेस्‍ट में खुद कबूली हैं। कोली का पर्दाफाश 2006 में तब हुआ जब रिंपा हलधर और पिंकी सरकार के अगवा होने का मामला नोएडा पुलिस में दर्ज हुआ। पुलिस ने बहुत कोशिशें कीं लेकिन नाकाम रही। 29 दिसंबर 2006 को बंगले के पीछे कुछ नर कंकाल बरामद हुए। पुलिस ने तफतीश तेज की और फिर बंगले के कंपाउंड में खुदाई की, जिसमें रिंकी और रिंपा समेत कुल 15 बच्‍चों के कंकाल बरामद हुए। पुलिस ने कोली और बंगले के मालिक पंढेर को तुरंत गिरफ्तार कर लिया। 3 जनवरी 2007 को केंद्र सरकार ने जांच समिति गठित की। 4 जनवरी को उत्‍तर प्रदेश सरकार ने सीबीआई जांच से इंकार कर दिया। 6 जनवरी को पुलिस पर सवाल उठे। 9 जनवरी को और बच्‍चों के कंकाल बरामद हुए।
२००६ से अब तक वो जिन्दा क्यों है सेकड़ो मासूमो को निगलने बाले इसे क्यों जिन्दा रखा है. नेता खुद किसी  हादसे के शिकार हुए तब संसद हमले के आरोपी को फांसी दे दी। पर देश बासियो की जान का कोई मतलब नही धन्य हो हिंदुस्तान धन्य हो हिंदुस्तान का कानून ,गाय माता की रक्षा भी कराके देख लो जो बेटियो और माओ की हत्या  करने वालो को सजा नही दे सकते तो वो एक जानवर को क्या समझे गे। 

Tuesday, 27 January 2015

अमेरिकी   राष्ट्रपति बराक ओबामा को  भारतीय गद्तंत्रा दिवस के अवसर पर  आमंत्रित करना और मुख्य अतिथि घोसित करना।  दोनों देशो के बीच मधुर समंधो को नए आयाम पर   ले जायेगा। इस मौके दुनिया के के सबसे ताकतबर ब्यक्ति ने भारत की सामर्थ्य और शक्ति को देखा। और उनसे प्रभाबित होते हुए दिखे । यंहा तक की अपने भासण में भारतीयों द्वारा किये गए कार्यो और सहयोग को अतुलनीय बताया और शिकागो में दिए गए युग पुरुष विवेकानंद स्वामी की तारीफ और कहा शाहरुख़,मिल्खा सिंह,मैरीकॉम पर हर भारतीयों को गर्व है।  भारतीय संस्कृति और योग से  पश्चिमी देश प्रभाबित है। ऐसा कहा। देखते है  आने बाले  समय में ये दोस्ती मोदीजी के हाई टेक इंडिया का सपना पूरा करेगी या नहीं। परन्तु एक बात तो साफ़ है मोदीजी और ओबामा की दोस्ती ने पडोसी देश की नींद उड़ा दी होगी। ओबामा के भासण का कुछ अंश , image source punjab kesari pic

Sunday, 25 January 2015


देश के सभी देशवासियो को रिपब्लिक डे की हार्दिक बधाई।  और ललकार ग्रुप देश की अखंडता और उज्वल भविस्य की कामना करता है और अनुरोध करता है संभिधान की गरिमा बनाये रखे और अहिंसा और सत्य को अपना ब्यबहार बनाये। जय हिन्द। जय जवान। जय किशान। जय अखण्ड भारत। 

Wednesday, 14 January 2015

मकरसंक्रांति के पर्व की  हार्दिक सुभकामनाये , खुश रहिये खुशिया  बांटते  रहिये।

Monday, 5 January 2015

धर्म परिवर्तन ,,  विहिप का  बयान   आता है की २०२० तक देश को हिन्दू राष्ट्र बनायेगे , और ओबैसी इस पर बयान देते है मुस्लिम राष्ट्र  बनायेगे ये दोनों लोग ही सत्ता की भूखे  लोग है जो लोगो क धुर्बिकरण का फायदा उठाना चाहते है, में इन लोगो के समर्थन करने वालो से पूछना चाहता हु, इस तरह की गुटबाजी क्या देश क हित  में है जब जब गुटवाजी हुए है राष्ट्रों का नाश ही हुआ है क्यों इन लोगो का मकसद धर्म परिवर्तन न करके मानव धर्म अपनाने को कहे जन्हा हर कोई हर किसी का दर्द समझे, क्यो घर बापसी से पहले उन असहज लाचार  लोगो क लिए छत बनाए जो सर्दी में मर जाते है
क्या ये लोग किसी आपदा में पहले पीड़ित से पूछेंगे हा भैया क्या मुस्लिम हो या हिन्दू, पीड़ित, और भूखे  का एक ही धर्म होता है तृप्ति मतलब जो उसकी सहायता करे वो उसका धर्म है, ये कुछ लोग देश की फ़िज़ा भिगाड़ रहे है , आज बोले रहे हिन्दू राष्ट्र , कल मुस्लिम राष्ट्र , फिर ईसाई , फिर पंजाबी, फिर ऐसे तरह देश क अलग अलग हिस्सों से आवाज आएगी, फिर अलग रास्त्र  होगा,गोवा  अलग,और अआंध्रा  अलग,
 लोगो  अपनी चेतना जगाओ जगाओ इन  लोगो  सिरे  समर्थन देना छोड़ छोड़ दो ये सहयोग बिकास में नही नही बिनाश में मांग रहे है, अगर इस्वर हमें किसी धर्म में चाहता होता  तो हमें उसी धर्म में पैदा करता,
ये इस्वर क नाम का कॉल सेंटर खोलकर बैठे है, इस्वर का नया फरमान आया है इसे मनो , इन लोगो से पूछो भैया तनिक इस्वर  को कॉल लगाकर पूछो हमारे देश का विकास कैसे सम्भब है , न की बिनाश,
पिता अपने हर बच्चे की मदत करता है उसके लिए न  कोई कम  और न कोई ज्यादा होता  है
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