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Monday, 5 October 2015

kya arakshan sach mein galat hai

हिन्दू ग्रंथो में जिस प्रकार ये बर्णित था , ब्राह्मण का सर्बोच्या स्थान, राज  करने का अधिकार केवल छत्रियो को, ब्यापार बैष्णवों को, और सूद्र केवल सेवा कर सकता है। कर्ण का पूर्णताः योग्य होने पर भी गुरु द्रोण द्वारा उन्हें शिक्षा न देना और इसी क्रम में एकलव्या के साथ किया गया छल।  क्या ये धर्म संगत था गीता के अनुसार ब्यक्ति सर्बोच्या कर्मो से होता है न की उसकी जाति  से। अगर ये है तो बर्तमान में सुतो को आरक्षण पूर्णतः न्यायसंगत है। युग बदला वक़्त बदला आरक्षण का मुद्दा सदैव बेहेस का मुद्दा बना रहता है। और ये बिचार मेशा सुनने में आते है की ये सामान्य श्रेणी की लोगो के साथ अन्याय है।  जब ये सुतो के साथ हुआ था तब ये हमारा धर्म था ईस्वर की बानी थी।  जब गुरु द्रोण सुतो की तरफ अपना पक्ष देता है तो इसमे अन्याय क्या।
क्या हिंदुस्तान सच में जातिबाद की सीमाओ से आगे बड़ चूका है ?
अगर हाँ ! केवल धर्म परिवर्तन करने बाले केवल सूत समुदाय से होते है क्या उन्हें अपने इस्वर पर भरोसा नही है।  नही केवल और केवल हमारा समाज , हमारा ब्यबहार केवल उत्तर दाई है।  क्यों हम किसी ब्यक्ति को अपने से कम आंकलन करते है, ललकार ग्रुप उन सभी सफाई कर्मियों को सर्बोच्च समझता है क्यूंकि बे सचमें अछूत है क्यूंकि बे अपने सुभिमान से दूर हटकर देश की सेवा करते  क्या उनका शरीर हमसे अलग है क्या उनसे ये पूछा  गया था की बे अछूत बनेगे नही। जीवन का सबसे बड़ा दुख उनके जन्म क उपहार के रूप में मिलता है। आरक्षण का बिरोध करने बालो में , में या कोई और अगर ये समझता है की अछूत को सम्मान स माज देगा ये बही बात होगी , सहारा में बारिश पड़ेगी और बन्हा हरीयाल आयेगी ये सम्भब नही है न उनके हक़ के बदल आयेगे न ही न खुशियो की बारिश होगी ,
                    हम उस वक़्त में जी रहे है अगर अनुसूचित   प्यासा  भी मरता है तो लोग उसे पानी देने से पहले उसकी जात पूछेंगे ,  आरक्ण के जन्म दाता भीम राओ अम्बेडकर इसी इस्तीथी से उथान के लिये इसे संभिधान में जोड़ा। जाति यहांतक हमारे देश के कुछ बिदूान लोग तो पुरे प्रदेश से परहेज़ करते है , सोच बदलिये जनाव हम सब पशु नही है जिन्हे श्रेणी और बर्गो में बांटा जाये की, ये उच्चा श्रेणी का है और ये तुच , देश की सेवा करने वाला हर पहरेदार हिंदुस्तानी की हिफाजत करता है न किसी ब्यक्ति बिशेष और जाति बिशेष की , देश की अखंडता तभी बनी रहेगी जब देश के हर ब्यक्ति की जाट हिंदुस्तानी और मजहब इंसानियत होगी,
                                

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