Translate

Wednesday, 1 July 2015

दोस्तों आज ट्रैन से आते वक़्त देखा ,एक बच्चा अपनी माँ से पूछता है।  माँ! अलीगढ आ गया क्या। माँ बोलती है हा पर तुझे कैसे पता लगा। बच्चा कहता है माँ ये गंदगी दिखने लग गई में समझ गया अलीगढ आ गया ,

क्या दोस्तों अपने अलीगढ के पहचान गंदगी और ये नाले ही रह गए है क्या,बिचार कीजिये।  एक बार !
जिलाध्यक्ष राजीव रौतेला द्वारा एक पहल की गई थी जिसके तहत अलीगढ में खली स्थानो पर पेड़ लगाने की योजना थी , आदेश का पालन भी हुआ , पेड़ भी लगे परन्तु मीठी उर्बरक न होने के कारन पोधे ख़राब हो गए, 
ललकार ग्रुप डीएम साहब के इस कार्य के प्रसंसा करता है, पर क्या पोधे ही महज कार्य था क्या सीमेंट की सड़को पर पोधे लगाये जा सकते थे अशोक जैसे बृक्ष को काफी मात्र में मिटटी की आबसयकता थी, क्या हाथ भर मिटटी प्पर्याप्त थी। फलतः करोड़ो रुपयो की बर्बादी , सोचिये ग जिम्मेदार कौन डीएम या हम. 
क्या हमारा कर्तब्य नही बनता था हम इसका बिरोध करे सोचिये, 

No comments:

Post a Comment