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Wednesday, 17 December 2014

पेशावर के आर्मी स्कूल में आतंकी हमला जिनमे १३२ बच्चो सहित १४१ लोगो की मोत  हो गई, तालिवान का का कहना है ये उनके खिलाफ की गई सैनिक कार्यबाही का जवाब है, इन मौत के फरिश्तो को ये कौन बताये ,सीमाओ पर युद्ध लड़े जाते है घरो में नही, जिन नज़रो ने अभी दुनियॉ को ठीक से देखा भी  नही था जिनकी आँखों में बुलंदियों को छूने के सपने थे, वो मासूम कभी न उठने वाली नींद में सो गए,

 ये किस धर्म में लिखा है मौत का बदला मौत होना चाहिए, इस तरह का काम करने वाला किसी धर्मं का नही हो सकता इन लोगो का मकसद केवल धेसद बाँटना है , इन बच्चो  को कल बनाना था, अब इन बच्चो के हाथ  ताबूत तक सिमट गये :'(
जमीं की  चाहत में, होती ये गोलियों की बारिशे
क्या अंजाम कर जाती है किसी की माँ का लाल खोता है,किसी का भाई खोता है,


  "गोलियों की बारिश में भुजती नही नफरत की  आग
कुछ सपने बिखर जाते है हमेशा के लिए,
बढ़ जाती है और नफरत  की आग और भी  जिसमे
कही घर जलते है कही सब जलते है  "

इस्वर इनकी आत्मा को जन्नत बक्से , 

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