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Wednesday, 17 December 2014

पेशावर के आर्मी स्कूल में आतंकी हमला जिनमे १३२ बच्चो सहित १४१ लोगो की मोत  हो गई, तालिवान का का कहना है ये उनके खिलाफ की गई सैनिक कार्यबाही का जवाब है, इन मौत के फरिश्तो को ये कौन बताये ,सीमाओ पर युद्ध लड़े जाते है घरो में नही, जिन नज़रो ने अभी दुनियॉ को ठीक से देखा भी  नही था जिनकी आँखों में बुलंदियों को छूने के सपने थे, वो मासूम कभी न उठने वाली नींद में सो गए,

 ये किस धर्म में लिखा है मौत का बदला मौत होना चाहिए, इस तरह का काम करने वाला किसी धर्मं का नही हो सकता इन लोगो का मकसद केवल धेसद बाँटना है , इन बच्चो  को कल बनाना था, अब इन बच्चो के हाथ  ताबूत तक सिमट गये :'(
जमीं की  चाहत में, होती ये गोलियों की बारिशे
क्या अंजाम कर जाती है किसी की माँ का लाल खोता है,किसी का भाई खोता है,


  "गोलियों की बारिश में भुजती नही नफरत की  आग
कुछ सपने बिखर जाते है हमेशा के लिए,
बढ़ जाती है और नफरत  की आग और भी  जिसमे
कही घर जलते है कही सब जलते है  "

इस्वर इनकी आत्मा को जन्नत बक्से , 

Saturday, 13 December 2014

अलीगढ धर्मान्तरण कार्यक्रम  के लिए डीएम का  साफ़ जवाब नही होने देंगे कार्यक्रम,  अलीगढ में गर्माती  सियासत कुछ कही अलीगढ  की  फिजाओ में  अशांति  न फैला दे,  जो लोग हिन्दू या मुस्लिम या किसी अन्य धर्म के  अनुयाई बनना चाहते है  खुद ऐसा करे, इस प्रकार के समहूहिक कार्यक्रम  का  क्या मतलब बनता है जो चाहे   एक सपथ पत्र भरकर ये घोसणा   कर सकता है की वो अब इस धर्म  का अनुयाई है , और अब इसके जो भी कर्म कांड है  करेगा , वो संभिधान  के तहत सवतंत्र है,  ये गंगा यमुनी तहजीव का केंद्र है, इस तरह    का  कार्यक्रम केवल  सक्ति  प्रदर्शन है, किसी  भी हिन्दू और मुस्लिम  का कोई संघ इस तरह  कर्यक्रम करता है तो ये असम्बैधानिक है, ललकार ग्रुप  इस्वर से प्रार्थना करता है अलीगढ  में अमन  शांति बने रहे, 

Wednesday, 10 December 2014



अलीगढ में इन दिनों धर्म परिवर्तन का नया ड्रामा देखने को मिल रहा है, ये समाज में  लोग अपने को इस्वर से ऊपर   समझने लगे है की  वो किसी का  धर्म  बदलबा सकते है, ये सब किसी न किसी  तरह से हिन्दू मुस्लिम भाइयो, सिख, ईसाई  भाइयो में द्वेष पैदा करना चाहते है, इस तरह का आयोजन संबिधान की गरिमा को ठेश पहुँचाता  है, ललकार ग्रुप ऐसे आयोजनों की निंदा करता है,
    

Tuesday, 9 December 2014

हासिम अंसारी के बयान पर राजनैतिंक  पार्टियो  के सभी मुख्य उनसे  मिलने पहुंचे, 
हासिम अंसारी का बयान यह सिद्ध करता है  मुस्लिम  और  हिन्दू  दोनों अपने अपने धर्म के प्रति  समर्पित है,  और दोनों के दूसरे के धर्म का सम्मान करते है, उनका बयान उनके लोगो की आवाज है की वो अब एक दूसरे से हिंसा  नहीं चाहते ऐसा मेरा मानना है, और इस   बात  मुद्दा न  बना केर इससे सीख ले,
बौखलाए मंत्री जी कहते है, ये सब उनकी फ़्रस्टेशन है, आखिर चुनाब  में मुद्दा क्या मिलेगा,   मस्जिद मंदिर दोनों ही ईस्वर के घरो क दरवाजे है, इसमे  जैसा है बैसा  ही रहने दो, पार्टिया समाजवादी  न होकर  राष्ट्रबादी  हो तभी इस देश का भला होगा , हिन्दू मुस्लिम कोटा,और अलग अलग  तरीको से बोट जीतना  छोड़ दे, 
  सरहद  पर खड़ा हुआ सिपाही  नही देखता की वो जिसकी जान बचा रहा  है हिन्दू भाई है या मुस्लिम भाई, 
तो दोनों धर्म क लोग क्यों आपस में लड़े,