Translate

Thursday, 30 July 2015

गोहत्या के खिलाफ शहर मुफ्ती ने की अपील

एक बार फिर अलीगढ के मुख्या मुस्लिम  धर्म गुरु मोह. खालिद साहब ने ये साबित कर दिया की देश का हिन्दू हो या मुस्लमान जब देश की बात आती है तो बो सिर्फ हिंदुस्तानी होता है।  और उसका मजहब देश की रक्षा होता है। खालिद साहब की तरह हिन्दू और सभी मुस्लिम एक दुसरो की भावनो की की कदर करे तो देश में सदेव अमन बना रहेंगे। हिन्दू मुस्लिम भाइयो को उकसाने बाले वो जो हमारे नेता कहलाते है। उनकी बातो को महत्ब न दे। ये न किसी मजहब के होते है न जात के ये सिर्फ बोटो की राजनीति के लिये किसी भी हद तक जा सकते है।


khalid sahab
source: amar ujala
गोहत्या के खिलाफ शहर मुफ्ती ने की अपील
अमर उजाला ब्यूरो
अलीगढ़। गोहत्या के खिलाफ बुधवार को शहर में मुसलिम समाज सड़कों पर उतर आया। शहर मुफ्ती मोहम्मद खालिद हमीद ने गो हत्या के खिलाफ अपील जारी की।
शहर मुफ्ती ने लोगों से कहा है कि ‘अल्लाह ने बहुत सी चीजों को हलाल करार दिया है। और उनके इस्तेमाल करने की इजाजत दी है। लेकिन ये हुक्म नहीं दिया है कि हम इन तमाम हलाल की चीजों को जरूर इस्तेमाल करें। इसी तरह गाय के हलाल होने का मसला है। हमारे मुल्क में चूंकि ‘गो हत्या’ से हमारे बहुत से हिंदू भाइयों की भावनाओं और जज्बातों को ठेस पहुंचती है, इसलिए हम पर ये लाजिम है कि हम इससे परहेज करें। और अपने हिंदू भाइयों की धार्मिक भावनाओं का एहतराम करें, ताकि हमारा भाईचारा भी कायम रहे व हमारे दर्मियान नफरत की दीवार खड़ी न हो। अलबत्ता हमारी शरीअत जहां हमें वाज-ए-हुक्म देती है उस हुक्म से मुंह मोड़ने की मजाल हर्गिज जायज नहीं है’।
संंबंधित खबरें पेज 3 पर

•कहा, जिन चीजों से हिंदू भाइयों की भावना को ठेस पहुंचती है उससे परहेज करें


Wednesday, 1 July 2015

दोस्तों आज ट्रैन से आते वक़्त देखा ,एक बच्चा अपनी माँ से पूछता है।  माँ! अलीगढ आ गया क्या। माँ बोलती है हा पर तुझे कैसे पता लगा। बच्चा कहता है माँ ये गंदगी दिखने लग गई में समझ गया अलीगढ आ गया ,

क्या दोस्तों अपने अलीगढ के पहचान गंदगी और ये नाले ही रह गए है क्या,बिचार कीजिये।  एक बार !
जिलाध्यक्ष राजीव रौतेला द्वारा एक पहल की गई थी जिसके तहत अलीगढ में खली स्थानो पर पेड़ लगाने की योजना थी , आदेश का पालन भी हुआ , पेड़ भी लगे परन्तु मीठी उर्बरक न होने के कारन पोधे ख़राब हो गए, 
ललकार ग्रुप डीएम साहब के इस कार्य के प्रसंसा करता है, पर क्या पोधे ही महज कार्य था क्या सीमेंट की सड़को पर पोधे लगाये जा सकते थे अशोक जैसे बृक्ष को काफी मात्र में मिटटी की आबसयकता थी, क्या हाथ भर मिटटी प्पर्याप्त थी। फलतः करोड़ो रुपयो की बर्बादी , सोचिये ग जिम्मेदार कौन डीएम या हम. 
क्या हमारा कर्तब्य नही बनता था हम इसका बिरोध करे सोचिये,