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Monday, 24 November 2014

 हिंदी के विकास में  कुछ कमिटी बनी  जिनका मुख्या उद्देस्य राष्ट्र  की बोली क विकास का है, क्या ये केवल इन तक ही सीमित है , भारत ऐसा देश है जन्हा रास्ट्रभासा का दर्जा  तो हिंदी को मिला है पर, अनेको परीक्षाओ  में इंग्लिश को अनिवार्य किया गया है क्या ये न्याय संगत, 
upsc की सभी परीक्षाओ में इंग्लिश को प्राथमिकता दी जाती है जिससे जो छात्र  हिंदी माध्यम क होते है वो सफल नही हो पाते और वो अयोग्य घोसित हो जाते है, क्या ये न्याय संगत है, हा हिंदी ग्लोबल लैंग्वेज नही है तो क्या हुआ चीन की तरह हमें भी अपनी भासा को बढ़ावा देना चाइये , सभी विचारो  आदानं प्रदान का माद्यम हिंदी  होना चाहिए, इंग्लिश को उसकी योग्यता का सर्टिफिकेट नही समझना चाहिए, दोस्तों जो दीप घर को रोशन न कर पाये, उससे जग रोशन की क्या उम्मीद लगाये, मतलब यही है हमें हिंदी क प्रयोग में सर्म का अनुभव नही करना चाहिए इंग्लिश तो पराई  कब दगा दे जाएगी पैर हिंदी तो अपनी साथी है दूर तक साथ निभाएगी , अपनी राय दीजिये, 

Sunday, 23 November 2014

भारत में  टैक्स चोरी  और आय से  अधिक सम्पति होने पर  सजा  के  कड़े प्राबधान है, पर भारत  की जनता का पैसा विदेश  में पहुचने वालो की सजा  का प्राबधान  क्यों नही है केवल कुछ महीनो की जेल यात्रा वो भी सभी प्रकार की सुख सुभिधाओ के साथ   निवास की  परंपरा क्यों है, क्यों  इन लोगो पर देश द्रोह तुल्या अपराध समझ कर सजानहीं  दी जाती, क्यों साधारण सी नौकरी हेतो ये अनिवार्य  है  की उसका कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड न  हो,देश चलाने  की नौकरी में, में  जितना  अच्छा क्राइम रिकॉर्ड  उतना  अच्छा  पद का रिवाज  क्यों है, क्यों संसद में वो लोग कानून  चर्चा करते है जो  खुद किसी न किसी अप्प्राध के दोषी है, 
                        ऐसे लोगो को चुनाव से दूर क्यों  नहीं  रखा जाता,  जब तक  ऑनरेबल सुप्रीम कोर्ट उन्हें  वाइजजत बरी न करे, अगर आप लोगो को भी लगता है की भारत के कानून में बुनियादी बदलाब होने` चाहिये`
            अपनी राय दीजिये             
कुछ इस तरह नया मंत्रालय नये मंत्रियो की भर्ती  के लिए खोला जाता है जितने  ज्यादा मंत्री उतना ज्यादा पाने का मौका सवाल  ये  उठता है इनका फायदा जनता को क्या मिलता है   अख़बार में पड़ने क लिए नई खबर मिल जाती है, सिर्फ, सुचना का  अधिकार है, जानकारी मिलने के बाद क्या समस्या  समाधान मिलता है , क्यों  समस्या विकराल रूप  न लेले तब तक सरकार के पास खबर क्यों नहीं   पहुचती,
  सर्व  शिक्षा अभियान जिनमे अध्यापक की स्वयं योग्यता पर  ऊँगली उठाई   जाती  बन्हा पर पढ़ने  बाले बच्चो को  मिलेगा क्या, क्यों यंहा भी  अध्यापक   चुनाव  अन्या की तरह नहीं होता क्यों ,, क्या ऐसे  विद्यालयों में भी किसी   मंत्री या बी ई  पी के बच्चे  पढ़ते है,  गरीब परिवारो  को  छात्रवती और मिडडेमील  का प्रलोबभन दिया जाता है, जनाब  तारो की   रौशनी से रात रोशन नही होती चाँद रोशन  करता है, मतलब  यही है तादात  पर मत जाओ गुडवत्ता को मायने दो, शिक्षा में  एकाधिकार दो एक अच्छे परिवार और एक गरीब परिवार बच्चा  शिक्षा पा सके न की दाल
चावल खिलाकर पेट की भूख मिटा दे और  मन की भूख  रह जाये
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