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Friday, 13 March 2015

इन दिनों गौ हत्या करने वालो  मृत्युदंड देने की मांग जोरो सोरो से उठ रही है। पर लोग ये भूल गये है की उस देश में रह है है जँहा निर्भया  के हत्यारो  को सरकारी मेहमान बना रखा है। अब तो अख़बार में रोजाना पड़ने को मिलता है मासूम के साथ बलातकार यंहा बन्हा। १६ दिसंबर की घटना के बाद लगा था अब देश में अच्छा कानून ब्यबस्ता आएगी पर कुछ नही हुआ दरिंदे रोजाना मासूमो को अपनी हवस का शिकार बनाते है ओरे कार्यबाही के नाम पर सिर्फ fir और फिर ये फाइल किसी कोने की शोभा बढ़ाती है हद्द है।  इन लोगो को मृत्युदंड नही मिलेगा तो फिर किसे मिलेगा। इसे तरह एक और दरिंदा अपनी जिंदगी मजे से काट रहा है सुरेन्द्र कोहली ,

बंगला नंबर 10 में बतौर नौकर काम करने वाला 39 वर्षीय सुरिंदर कोली अपने गेट पर नज़र रखता था। शाम ढलते वक्‍त जब इलाके में सन्‍नाटा छा जाता था, तब वो गेट के पास से निकलने वाली लड़कियों को पकड़ लेता और मुंह में कपड़ा ठूस कर उनके साथ बलात्‍कार करता था। उसके बाद उन लड़कियों की हत्‍या कर उनके शव के कपड़े उतार कर फिर से बलात्‍कार करता था। कोली की हैवानियत तब तो चरम पर होती थी, जब वो उन्‍हीं लड़कियों के शव के टुकड़े कर उन्‍हें खाता था और बचे कुचे टुकड़ों को बंगले के कंपाउंड में दफ्ना देता था। ये सभी बातें कोली ने नारको टेस्‍ट में खुद कबूली हैं। कोली का पर्दाफाश 2006 में तब हुआ जब रिंपा हलधर और पिंकी सरकार के अगवा होने का मामला नोएडा पुलिस में दर्ज हुआ। पुलिस ने बहुत कोशिशें कीं लेकिन नाकाम रही। 29 दिसंबर 2006 को बंगले के पीछे कुछ नर कंकाल बरामद हुए। पुलिस ने तफतीश तेज की और फिर बंगले के कंपाउंड में खुदाई की, जिसमें रिंकी और रिंपा समेत कुल 15 बच्‍चों के कंकाल बरामद हुए। पुलिस ने कोली और बंगले के मालिक पंढेर को तुरंत गिरफ्तार कर लिया। 3 जनवरी 2007 को केंद्र सरकार ने जांच समिति गठित की। 4 जनवरी को उत्‍तर प्रदेश सरकार ने सीबीआई जांच से इंकार कर दिया। 6 जनवरी को पुलिस पर सवाल उठे। 9 जनवरी को और बच्‍चों के कंकाल बरामद हुए।
२००६ से अब तक वो जिन्दा क्यों है सेकड़ो मासूमो को निगलने बाले इसे क्यों जिन्दा रखा है. नेता खुद किसी  हादसे के शिकार हुए तब संसद हमले के आरोपी को फांसी दे दी। पर देश बासियो की जान का कोई मतलब नही धन्य हो हिंदुस्तान धन्य हो हिंदुस्तान का कानून ,गाय माता की रक्षा भी कराके देख लो जो बेटियो और माओ की हत्या  करने वालो को सजा नही दे सकते तो वो एक जानवर को क्या समझे गे।