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Saturday, 16 January 2016

मित्रो हर सप्ताह आने वाले भर्तियां से परेशान हो गया हु।  कुछ सौ सीटों के लिये कई लाख बच्चे अबेदन करते है। परन्तु भर्ती कभी कैंसिल हो जाती है कभी परिणाम ही नही आता।  पर सोचिये प्रतियेक व्यक्ति से २००-५०० लिए जाते है।  सोचिये २० लाख लोगो से कितना पैसा सरकार के पास जाता है।  यही पैसा सरकार अपने घटिया प्लान से जनता में बाँट देती है।  परीक्षा और भर्ती कैंसिल होने पर छात्रों का पैसा बापस नही आना चाइये।
      पिछले कुछ वर्सो से कई भर्तियां आई और रद्द हो गया , और छात्रों का पैसा वर्बाद हो गया।  और सारा पैसा सरकार के कहते में।  दुकान पर राशन न मिले तो झगड़ा हो जाता है पर इस बड़े मुद्दे का क्या हो। जब किसी फालतू स्कीम के लिये पैसा चाइये होता है और नई भारतीयों की घोसणा की जाती है।  और आप समझदार है में कहना क्या चाह रहा हु।
सोचिये वो लोग जिनके घर में खाना दो वक़्त का नही होता और बे कही न कही से पैसे का जुगाड़ करता है।  और उसे मिलता क्या है कुछ नही।
मोदी जी , कुछ कीजिये , हम लोगो की मैं की बात सुन लीजिये 

Monday, 4 January 2016

भारत माताके गौरव की रक्षा और कर्तव्य निभाते हुए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले सेना के रणबांकुरों को शत शत नमन.....जय हिन्द 
देश के वीर जवानो आपने जो किया उसका मोल लगाना मुश्किल है 
इसके लिये देश का हर नागरिक नम आँखों से आपका धनयबाद 
करता है। 






Thursday, 3 December 2015

कई सालो से कई एलान किये गये सरकार द्वारा कभी फ्री लैपटॉप, स्कूटी, भत्ता परंतू न किसी सरकारी नये विद्यालय बनबाये और न उनके विकास के लिये भत्ते की घोसना , हमेशा बोला जाता शिक्षा बच्चो का जन्मसिद्ध अधिकार है। बरसो से चले आ रहे मैनेजमेंट न ही स्कूल्ज बनबाये सहायता के नाम पर सिर्फ बच्चो का जीवन उजाड़ने बाले टीचर, जो किसी न किसी सोर्स से एंटर कर जाते है, और वर्सो तक यही सिलसिला चलता जाता है.
क्या लैपटॉप बच्चो की बेहतर शिक्षा से एहम है।
क्या सरकारी स्कूल्ज का आधुनिकरण नही होना चाइये.
क्या आईटी के इस युग में बच्चो को कंप्यूटर से दूरी सही है।
क्या बच्चो का पेट भरना ही काफी है , जनाब स्कूल शिक्षा का मंदिर है ढाबा नही।  कवर पेट भरना आज खुस कर सकता है परन्तु जीवन जीने का तरीका कान्हा से सीखे
क्या हमारा विवेक इतना मिट गया की हिन्दू-मुस्लिम , राम-अल्लाह, मंदिर-मस्जिद पर ही रह जाएगे
              देश में केंद्रीय स्कूल केवल सरकार कर्मचारी के बच्चो के लिए है , क्या केंद्रीय स्कूल स्तर के स्कूल किसान ओरे मजदूर के बच्चो को नही मिल सकते ,

क्या ये प्राभदान नही होना चाइये की सरकारी सेवा लेने बाले हर ब्यक्ति को अपने बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ाने होंगे, ओर उलंघन करने बालो को सरकार सुभिधाओ से बंचित  करदेना चाइये।
    दोस्तों लोकपाल , रिजर्वेशन तो ठीक है परन्तु इनसे ऊपर भी कई चीज़े है जिन्हे सुधार की आवसयकता है.

क्या आप भी इस उम्मीद है आपका बच्चा जो आठबी पास है और मुख़्यमन्त्री  बन जायेगा।  तब तो ये ठीक है हम आपके इच्छा पूरी होने  की कामना करते है
         

Friday, 20 November 2015

आओ पहल करते है ,

आओ पहल करते है ,

में इस बात की घोसणा करता हु ललकार ग्रुप का हर परिवार अपनी एलपीजी सब्सिडी छोड़ देगा जिस दिन नेताओ और मिनिस्टर को मिलने बाली  सभी सुभिधाएँ छोड़ दे, करोड़ो विदेश यात्रा , और कैंटीन में मिलने बलि छूट , भत्ता सब छोड़े ,
क्या ये सब छूट गरीब को मिलने बाली  सब्सिडी  से कम है।  गरीबो का दिल बहुत बड़ा है जब 0 अमाउंट पर खाता खुल्बाने पर २०००० करोड़ जमा कर डाले , तो बिस्वास रख्खिये जनाब मंत्री जी पहल करे तो हर घर सब्सिडी छोड़ देग.
                  और बेसे गरीब के सब्सिडी छोड़ने से किसी और गरीब को कैसे फायदा होगा, कनेक्शन अब भी मिलते है पैसो के बदले पैसा न गरीब के पास तब था न आज है,  चलो ऐसा करो हमारी एलपीजी सब्सिडी जिंदगी भर के लिए लेलो और तुरंत किसी गरीब को फ्री कनेक्शन देदो तुरंत सामने अगर ये सम्भब है तभी एलपीजी की सब्सिडी छोड़े।  क्या सारे त्यागने का काम जनता करे।  २० करोड़ रुपया सालाना विदेश यात्रा में खर्च करते है। pm  साहब का तो ठीक है जनाब हर मुमकिन कोसिस कर रहे है तरक्की लाने की पर ६० की उम्र में एजुकेशनल ट्रिप पर जाना ये तर्क सांगत नही लगता , ओरे बैसे राजनीती में आने के लिये कौनसी एसएससी की परीक्षा पास करनी पड़ती है।  pm साहब मैं की अबाज आपके हम तक तो आगई क्या "जनता की आवाज'" आपने सुनी।
केंद्रीय कर्मचारी की १६ % बेतन बढ़ गया ये कोनसे अच्छे काम का बोनोस से दिया और bsf और आर्मी को क्या मिला।  कमाल है

Sunday, 11 October 2015


“In India, ‘Bhakti’ or what may be called the path of devotion or hero-worship plays a part in politics unequalled in magnitude by the part it plays in the politics of any other of the world. ‘Bhakti’ in religion may be a road to salvation of the soul. But in politics, ‘Bhakti’ or hero-worship is a sure road to degradation and to eventual dictatorship.”

Monday, 5 October 2015

‘मुझे खिलौनों से नहीं कंप्यूटर से प्यार है। वैसे लोग कहते हैं कि ये कठिन है, पर मुझे तो नहीं लगा'', यह कहना है 5वीं क्लास के छात्र रोनिल शाह का जिसने Java SE-6 के 3 घंटे टेस्ट महज 18 मिनट में पास कर लिया। रोनिल का लक्ष्य एडवांस जावा, रोबोटिक्स, आईफोन और एंड्रॉयड के बारे में सीखना है।
रोनिल पर हमे गर्व है।